नोयडा मे अधिकारी डकार रहे गरीबों का निवाला,दर्जनो लोग भूखे रहने को मजबूर,नियमो को खुटी पर टांग रहे राशन डीलर
नोएडा-
नोएडा शहर की गिनती हाइटेक शहरों में की जाती है व प्रदेश सरकार द्वारा हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराना का दावा किया जाता है पर हकीकत इससे कोसों दूर है यहा आम आदमी रोज नई-नई समस्याओं से रूबरू होते है।बात करे नोएडा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तो यहा भष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है।बात करते है नोएडा के चौड़ा गाँव की तो यहा आये दिन शिकायत मिलती है कि सरकारी राशन की दुकान महीने में केवल एक या दो दिन खुलती है जबकि नियम ये है कि दुकान रोज खुलनी चाहिए।आम आदमी अगर सरकारी सस्ते गल्ले के डीलर की बतायी तिथि पर नही पहुचता है तो उसको राशन नही दिया जाता है।चाहे उसकी कैसी भी समस्या क्यों न हो।लोगो की माने तो उनके राशन की डीलर कालाबाजरी करते है और तो और जब खाद्य साम्रगी का वितरण किया जाता है तो वहा पर कोइ प्रवर्षक मौजूद नही होता जो होना चाहिए ।लोगों की माने तो 6-6 महीने हो जाने के बाद भी उनके राशन कार्ड अभी तक नही मिल पाये है।बार-बार शिकायत करने के बाद भी क्षेत्रीय अधिकारी कुछ नही करते।इसके विपरीत जो सुविधा शुल्क दे देता है उसका राशन कार्ड बन जाता है।कुछ लोगों की शिकायत है कि अगुली मिलान न हो पाने के कारण वे राशन लेने से वचिंत रहते है।इसमें हमारा क्या दोष।लेकिन हद तो तब हो जाती है जब कोइ विक्लांग या कैंसर पीड़ित व्यक्ति को भी राशन नही मिल पाता है।क्या विभाग के र्कमचारीयो की मानवता भी मर चुकी है जो कमजोर व लाचार लोगों की भी नही सुनती जबकि जो सुविधा शुल्क देता है।उसका काम आराम से हो जाता है।जब इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी से बात हुयी तो उन्होंने बताया कि इस मामले में जाँच करके आरोपियों के खिलाफ कारवाई की जायेगी।
नोएडा शहर की गिनती हाइटेक शहरों में की जाती है व प्रदेश सरकार द्वारा हर तरह की सुविधा उपलब्ध कराना का दावा किया जाता है पर हकीकत इससे कोसों दूर है यहा आम आदमी रोज नई-नई समस्याओं से रूबरू होते है।बात करे नोएडा के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की तो यहा भष्टाचार अपनी चरम सीमा पर है।बात करते है नोएडा के चौड़ा गाँव की तो यहा आये दिन शिकायत मिलती है कि सरकारी राशन की दुकान महीने में केवल एक या दो दिन खुलती है जबकि नियम ये है कि दुकान रोज खुलनी चाहिए।आम आदमी अगर सरकारी सस्ते गल्ले के डीलर की बतायी तिथि पर नही पहुचता है तो उसको राशन नही दिया जाता है।चाहे उसकी कैसी भी समस्या क्यों न हो।लोगो की माने तो उनके राशन की डीलर कालाबाजरी करते है और तो और जब खाद्य साम्रगी का वितरण किया जाता है तो वहा पर कोइ प्रवर्षक मौजूद नही होता जो होना चाहिए ।लोगों की माने तो 6-6 महीने हो जाने के बाद भी उनके राशन कार्ड अभी तक नही मिल पाये है।बार-बार शिकायत करने के बाद भी क्षेत्रीय अधिकारी कुछ नही करते।इसके विपरीत जो सुविधा शुल्क दे देता है उसका राशन कार्ड बन जाता है।कुछ लोगों की शिकायत है कि अगुली मिलान न हो पाने के कारण वे राशन लेने से वचिंत रहते है।इसमें हमारा क्या दोष।लेकिन हद तो तब हो जाती है जब कोइ विक्लांग या कैंसर पीड़ित व्यक्ति को भी राशन नही मिल पाता है।क्या विभाग के र्कमचारीयो की मानवता भी मर चुकी है जो कमजोर व लाचार लोगों की भी नही सुनती जबकि जो सुविधा शुल्क देता है।उसका काम आराम से हो जाता है।जब इस बारे में जिला पूर्ति अधिकारी से बात हुयी तो उन्होंने बताया कि इस मामले में जाँच करके आरोपियों के खिलाफ कारवाई की जायेगी।
रिपोर्ट-प्रियंका शर्मा




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