वक्ताओं ने कहा तीन तलाक में कोई परिवर्तन नहीं होगा स्वीकारसौंपा राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन
मैनपुरी-भोगांव चाहे कोई भी हो मुस्लिम शरीयत के बारे में बदलाव करना चाहे, वह नहीं कर सकता। आज देश में तीन तलाक को लेकर कुछ लोग शरियत में बदलाव कराने पर उतारू हैं। ये किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उक्त बातें खानकाह रशीदिया के सज्जादा नशीं हाजी अब्दुल रहमान खां चिश्ती उर्फ बबलू मियां ने नगर के फाजिलगंज स्थित बाबा की दरगाह के मैदान में तीन तलाक व कामन सिविल लॉ के संबंध में आयोजित मुस्जिम समाज के जलसे को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहाकि कुछ मुस्लिम महिलाओं को गुमराह कर तीन तलाक को खत्म करने के लिए न्यायालय में हलफनामे लगवाए गए हैं। हम लोग मुस्लिम पर्सनल ला में किसी तरह का हस्तक्षेप सहन नहीं करेंगे। उन्होंने इस्लामी सरियत के तमाम अहकाम से खाश तौर पर तलाक खोला फलक और बिरासत के दीनी अहकाम से पूरी तहर मुतमईनी होने और उनमे किसी तरह की तब्दीली की जरूरत व गुजांयश से इंकार किया गया। इशहाक मौलाना ने कहा कि हम भारत वर्ष के लोग हैं और भारत वर्ष में हर धर्म के मानने वाले रहते हैं,
सभी को धर्म पर चलने की पूरी स्वतंत्रता संविधान में दी गयी है। हमें किसी भी रूप में यूनीफार्म सिविल कोर्ट स्वीकार नहीं है। हम कानून शरीयत की हिफाजत में पूरी तरह से आल इंण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। मुफ्ती जाहिद ने जलसे में मुस्लिम समाज से उर्दू सीखने की नसीहत देते हुए एकजुट होकर घरों से लेकर बाजारों तक कामन सिविल लॉ एवं तीन तलाक के मामले पर विरोध जताने की अपील की। हम्मद रजा साहब ने कहाकि मुस्लिम समाज अपने हकों को जानें। आज हमारी शरियत में हस्तक्षेप करने के लिए भ्रम फैलाया जा रहा है। अलीगढ़ के जमीरूल हसन ने कहाकि को हम अपनी दीन से संबंधित किताब शरियत पर हजारों वर्षों से एक थे, एक हैं और एक रहेंगे। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में भी बदलाव के प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। इससे पूर्व नगर में मुस्लिम समाज के सभी व्यापारी व दुकानदारों अपने अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। स्थानीय मुस्लिम महिलाओं ने भी जलसे में पहुंचकर तीन तलाक के मुद्दे पर किसी भी तरह का बदलाव किए जाने का विरोध जताया। लोगों ने राष्टपति के नाम संबोधित ज्ञापन तहसीलदार राकेश कुमार व प्रभारी निरीक्षक अरूण कुमार को सौंपा।
जलसे में एएच हासमी एडवोकेट, अकबर कुरैशी, मुफ्ती नदीम, मु्फ्मी कासिम, मौलाना खालिद नजमी, कारी नईम, कारी जुबैर अहमद, मुफ्ती जफर खां, मुफ्ती जलीम, हम्माद रजा, जमीरूलहसन, गुलाम रसूल, मौलाना मुईद, सैफ रजा, अब्दुल जलील, तसलीम रजा, मौलाना रहीम, शकील उर्फ फूलमियां, अफसर नवाज, आमिर रियाज, हाफिज जाकिर, अयाज मंसूरी, अंजुम, हाफिज अहमद अली, केसर रियाज, मास्टर गुलजार, हाफिज खालिद, हाफिज अनीस, हाफिज तौफीक, अब्दुल सलाम, इरफान अंसारी, अब्दुल जलील, इमरान चौधरी, मो0 रफी, हनीफ एड0, मो0 शमीम, मा0 नसीरूद्दीन आदि लोग मौजूद रहे। संचालन फिरोजाबाद के मौलाना मुफ्ती अमीन ने किया।

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