डीजीपी यूपी के पुलिस छवि सुधार अभियान को गति दे रहे सचिन कौशिक
डीजीपी यूपी के पुलिस छवि सुधार अभियान को गति दे रहे सचिन कौशिक
आगरा-
सोशल मीडिया पर सक्रियता के चलते SP ने बनाया अपना PRO
वर्तमान मे पुलिस अधीक्षक रेलवे आगरा के वतौर PRO तैनात सचिन कौशिक ने क़रीब 1 वर्ष पूर्व सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाकर आम जन-मानस में बनी नकारात्मक सोच को बदलने और अपने साथी पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से “पुलिस छवि सुधार:-एक मुहिम” के नाम से फ़ेसबुक और ट्विटर पर पेज बनाकर शुरुआत की थी।लेकिन स्वयं सचिन कौशिक को इसका अंदाज़ा तक नहीं था कि इतना बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
दरअसल हम बात कर रहे हैं आगरा में तैनात कांस्टेबल सचिन कौशिक की जो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इन्होंने कोई हीरोगिरी का काम नहीं किया है, बल्कि जनता के मध्य पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने के लिए एक मुहिम चला रहे हैं। इनकी मुहिम को पब्लिक के साथ-साथ पुलिस के उच्चाधिकारियों की भी जमकर वाहवाही मिली है।यही कारण है कि इनके फ़ेसबुक प्रज को 5 में से 4.8 रेटिंग मिल रही है जिसका सीधा सा अर्थ है कि जनता सचिन कौशिक की मुहिम को पसंद कर रही है। अलीगढ़ के क़स्बा गोरई से ताल्लुक रखने वाले सचिन कौशिक ने अपनी खास मुहिम www.ShineNews.Co.In के साथ शेयर की।
आगरा-
सोशल मीडिया पर सक्रियता के चलते SP ने बनाया अपना PRO
वर्तमान मे पुलिस अधीक्षक रेलवे आगरा के वतौर PRO तैनात सचिन कौशिक ने क़रीब 1 वर्ष पूर्व सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाकर आम जन-मानस में बनी नकारात्मक सोच को बदलने और अपने साथी पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाने के उद्देश्य से “पुलिस छवि सुधार:-एक मुहिम” के नाम से फ़ेसबुक और ट्विटर पर पेज बनाकर शुरुआत की थी।लेकिन स्वयं सचिन कौशिक को इसका अंदाज़ा तक नहीं था कि इतना बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
दरअसल हम बात कर रहे हैं आगरा में तैनात कांस्टेबल सचिन कौशिक की जो सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। इन्होंने कोई हीरोगिरी का काम नहीं किया है, बल्कि जनता के मध्य पुलिस की सकारात्मक छवि बनाने के लिए एक मुहिम चला रहे हैं। इनकी मुहिम को पब्लिक के साथ-साथ पुलिस के उच्चाधिकारियों की भी जमकर वाहवाही मिली है।यही कारण है कि इनके फ़ेसबुक प्रज को 5 में से 4.8 रेटिंग मिल रही है जिसका सीधा सा अर्थ है कि जनता सचिन कौशिक की मुहिम को पसंद कर रही है। अलीगढ़ के क़स्बा गोरई से ताल्लुक रखने वाले सचिन कौशिक ने अपनी खास मुहिम www.ShineNews.Co.In के साथ शेयर की।
अपनी मुहिम के लिए इन्होंने एक पूरा पेज डिजाइन किया है, जिस पर पुलिसवालों द्वारा किए अच्छे-अच्छे कार्यों को अपनी भाषा में लिखकर पोस्ट करते है और उन्हें ख़ूब लाइक और SHARE किया जाता है।जिसका असर अब साफ-साफ़ दिखने लगा है।उत्तर प्रदेश पुलिस दिन-ब-दिन निखरती जा रही है।पुलिसकर्मी आगे आकर अच्छे कार्य कर रहे हैं।
स्वयं सूबे की पुलिस के मुखिया प्रदेश की पुलिस की छवि को सुधारने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वह पुलिस की छवि को लेकर कितने
चिंतित हैं।ऐसे में सचिन कौशिक ने अपनी मुहिम के ज़रिए और गति दे दी है।
“बक़ौल सचिन कौशिक में ख़ुद एक सिपाही हूँ,जनता से हमारा सीधा संवाद और सबसे पहले होता है,हम पुलिसकर्मी इसी समाज के बेटे हैं,विपरीत परिस्थितियों में भी दिन रात २४ घंटे हम अपने इस समाज की सेवा में तत्पर रहते हैं।कोई भी आम आदमी घर से बाहर निकल जाए तो किसी भी मुसीबत में वहाँ हम पुलिस कर्मी ही एक call पर पहुँचते हैं,समस्या चाहे जैसी हो,उसका निवारण करते हैं,उसके बावजूद भी हमें उपेक्षा ही मिलती है।
स्वयं सूबे की पुलिस के मुखिया प्रदेश की पुलिस की छवि को सुधारने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।जिससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि वह पुलिस की छवि को लेकर कितने
चिंतित हैं।ऐसे में सचिन कौशिक ने अपनी मुहिम के ज़रिए और गति दे दी है।
“बक़ौल सचिन कौशिक में ख़ुद एक सिपाही हूँ,जनता से हमारा सीधा संवाद और सबसे पहले होता है,हम पुलिसकर्मी इसी समाज के बेटे हैं,विपरीत परिस्थितियों में भी दिन रात २४ घंटे हम अपने इस समाज की सेवा में तत्पर रहते हैं।कोई भी आम आदमी घर से बाहर निकल जाए तो किसी भी मुसीबत में वहाँ हम पुलिस कर्मी ही एक call पर पहुँचते हैं,समस्या चाहे जैसी हो,उसका निवारण करते हैं,उसके बावजूद भी हमें उपेक्षा ही मिलती है।
पुलिस और अन्य विभागों में हैं,चूँकि हम भी यहीं से आते हैं।
सिक्के के दो पहलू होते हैं,आप किसी एक ब्यक्ति विशेष के कार्य से पुरे परिवार या गाँव का आंकलन नहीं कर सकते।और यदि करते हैं तो मै इसे न्यायसंगत नहीं मानता।पुलिस को लाख गलियाँ देने वाला ब्यक्ति भी जब किसी मुसीबत में फँसता है तो वी भी सबसे पहले पुलिस को ही याद करता है। ऐसी दोगली मानसिकता पर कभी कभी हँसी आती है।
मै तो ये मानता हूँ कि आप यदि नकारात्मक पर कोसते हैं तो फिर आपको सकारात्मकता पर उसकी प्रशंसा भी करनी चाहिए।
ये काम थोड़ा बोर करने वाला भी है लेकिन जब मुझे आम जनता और ख़ासकर युवा वर्ग का और मेरे साथी युवा पुलिसकर्मियों का सहयोग मिलने लगा तो मुझे और अधिक ऊर्जा का अहसास होने लगा।इस से अलग अपने साथी पुलिसकर्मियों को उत्साहित करता रहता हुँ ताकि उनका मनोबल न गिरने पाए। मै शुक्रगुज़ार हुँ अपने साथियों का जो मुझे इस काम के लिए ऊर्जावान बनाए रखते हैं और ख़ुद भी जनता के बीच जाकर पुलिस शब्द की गरिमा का ख़याल रखते हुए सेवा में तत्पर रहते हैं।
सिक्के के दो पहलू होते हैं,आप किसी एक ब्यक्ति विशेष के कार्य से पुरे परिवार या गाँव का आंकलन नहीं कर सकते।और यदि करते हैं तो मै इसे न्यायसंगत नहीं मानता।पुलिस को लाख गलियाँ देने वाला ब्यक्ति भी जब किसी मुसीबत में फँसता है तो वी भी सबसे पहले पुलिस को ही याद करता है। ऐसी दोगली मानसिकता पर कभी कभी हँसी आती है।
मै तो ये मानता हूँ कि आप यदि नकारात्मक पर कोसते हैं तो फिर आपको सकारात्मकता पर उसकी प्रशंसा भी करनी चाहिए।
ये काम थोड़ा बोर करने वाला भी है लेकिन जब मुझे आम जनता और ख़ासकर युवा वर्ग का और मेरे साथी युवा पुलिसकर्मियों का सहयोग मिलने लगा तो मुझे और अधिक ऊर्जा का अहसास होने लगा।इस से अलग अपने साथी पुलिसकर्मियों को उत्साहित करता रहता हुँ ताकि उनका मनोबल न गिरने पाए। मै शुक्रगुज़ार हुँ अपने साथियों का जो मुझे इस काम के लिए ऊर्जावान बनाए रखते हैं और ख़ुद भी जनता के बीच जाकर पुलिस शब्द की गरिमा का ख़याल रखते हुए सेवा में तत्पर रहते हैं।
सचिन कौशिक को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक नितिन तिवारी द्वारा उनके कार्यों को देखते हुए अपना पीआरओ बनाया था साथ ही 5000₹ के नगद पुरस्कार से सम्मानित किया था।और मुहिम हेतु बधाई भी दी थी।जबकि अभी तक PRO पद पर सब इंस्पेक्टर या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारी की ही तैनाती की जाती थी।
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